Sunday, July 17, 2011

कोई भी सम्पूर्ण नही होता

एक आदमी पत्थर काटने का काम करता था , लेकिन वह ख़ुद से खुश नही था उसे लगता था ,यह  काम बहुत ही निचले दर्जे का है और वह इससे भी बेहतर कुछ कर सकता है ।उसने पत्थर काटने का काम बंद कर दिया और नौकरी खोजने के लिए निकल पड़ा

एक दिन वह नौकरी के सिलसिले में एक व्यापारी से मिलने गया वहा उसने एक व्यापारी का घर देखा घर देखते ही उसके मन में ख्याल आया की काश ! वह भी एक अमीर  व्यापारी बन पता और उसके पास भी इतना ही आलिशान मकान होता भगवान ने उसकी सुन ली और उसे एक व्यापारी बना दिया


दिन बीतते गए और एक दिन राजा का मंत्री राज्य के दोरे पर निकला उसने देखा की राजा का एक मंत्री दुसरे व्यापारी के घर रहा हैं डरा हुआ व्यापारी मंत्री के आगे घुटने के बल झुक गया मंत्री कितना शक्तिशाली हैं उसने सोचा की काश ! भगवान  मुझे भी एक मंत्री बना देता और भगवान् ने एक बार फिर से उसकी सुन ली और उसे मंत्री बना दिया

मंत्री बनाने के बाद उसे लगातार राज्य के दौरे  करने पड़ते एक दिन भरी दोपहरी में जब सूरज अपनी पुरी गरमी के साथ चमक रहा था मंत्री बने आदमी को लगा की सूरज ही सबसे ज्यादा शक्तिशाली हैं और उसने सूरज बनाने की इच्छा की भगवान् ने उसे सूरज भी बना दिया सूरज बनने के बाद उसने महसूस किया की बादल सूरज की किरण को रोक देते हैं उसे लगा की बादल बनकर वह ज्यादा खुश होगा और भगवान् ने उसे बादल बना दिया

तब उसने सोचा की हवा सबसे ज्यादा शक्तिशाली है ।बादलों को उड़ाकर ले जाती है और हवा मकान को भी गिरा सकती है , लेकिन चट्टान को नही हिला सकती उसने सोंचा काश ! मैं चट्टान होता ! जो सबसे ज्यादा मजबूत है और भगवान् ने उसे चट्टान बना दिया

फिर एक दिन चट्टान ने देखा , हथोड़ा और छैनी लिए एक पत्थर काटने वाला चट्टान की तरफ चला रहा था शायद वो उसी चट्टान को काटने रहा था

No comments:

Post a Comment